Skip to main content

Yun anjuman se bekaraar aaye. Ghazal

आदाब

यूँ  अंजुमन  से  बेकरार आये
किसी से होकर शिकार आये

किसी  ने  ना  दी  हमें  सदायें
वहां पे  किसको पुकार आये

नशा  मुहब्बत का  है  नशीला
बिना  पिये  ही   ख़ुमार  आये

नहीं  मिटूँगा  न  कोशिशें  कर
हजा़र    देखे,    हजा़र    आये

किसी को मिलते गुलों के साये
किसी  के हिस्से में  खा़र आये

कोई भी भूखा न  सोए  या रब
सभी  को  रोटी  दो  चार आये

कभी  खुशी   को   रहे  तरसते
कभी  तो    ये   बेशुमार   आये

मुझे  मिटाने   की   हसरतों  में
तुम्हारे    जैसे    हजा़र    आये

अभी ये आलम खि़जा़  बना है
दुआ   करो   के   बहार   आये

खुदा  तो   पूछेगा  आरज़ू   को
ये  ज़िन्दगी  क्यों  गुज़ार  आये

आरज़ू -ए-अर्जुन

Comments

Post a Comment