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AARZOO KI GHAZAL

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aarzoo ki ghazal

NARI DIVAS PE

aarzoo ki kalam se

पहला क़दम उठाओ !

बस,पहला क़दम उठाओ 
हमने खुद को खुद की ही बेड़ियों में जकड लिया है, अपने ही दायरे में सिमट कर रह गए हैं। हमने अपनी सोच समझ को सीमित कर लिया है, अपनी सहूलियत के मुताबिक एक सुरक्षा घेरा बना लिया है, अब उस घेरे से बाहर क़दम रखने में डर लगता है। जितनी ज़रूरत है उतना ही दिमाग चलता है उतने ही पाँव चलते है यहाँ तक कि हमने अपने ख़ाबों को भी दायरे में बांध रखा है। 
बड़ी अजीब सी बात है, आज ख़ाब किसी और के हैं, देखता कोई और है, पूरा कोई और कर रहा है, कमाल है। पूरी प्रणाली मशीनी हो गई है। आज हम अपने नहीं अपनों के ख़ाब पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं और उसके लिए मेहनत हम नहीं हमारे अपने यानि माँ बाप, बड़े भाई यां बहिन करती हैं, सिर्फ़ ज़रिया हम बनते हैं। इस तरह से हम कुछ बन भी गए तो हमारी योग्यता क्या होगी,हमारी गुणवता क्या होगी। हम दूसरों से साधारण होंगे, दूसरे हमसे ज्यादा अक्लमंद होंगे, उनका तज़ुर्बा हमसे बेहतर होगा। और ऐसा क्यों होता है ? क्योकि हमने अपना पहला कदम खुद नहीं उठाया था। हमने अपनों की बैसाखिया थाम रखी थी। कभी धूप बर्दाश्त ही नहीं की, बारिश में ठिठुर के काँपे ही नहीं, कभी आग में जले ही नहीं, कभी न…

DIL TUMHARA JAB CHURAYA JAYEGA.. GHAZAL

आदाब
दिल तुम्हारा जब चुराया जाएगा
दोष तुमपर ही लगाया जाएगा

इस मुहब्बत में फ़क़त पहले पहल
तुमको पलकों पर बिठाया जाएगा

तोल लेना पर को तुम अपने यहाँ
तुमको ऊँचा भी उड़ाया जाएगा

उड़ना लेकिन छोड़ मत देना ज़मीं
तुमको नीचे भी गिराया जाएगा

झांकना मत आंखों में वो फ़र्ज़ी है
ख़ाब झूठा ही दिखाया जाएगा

बढ़ रहे आहिस्ता से तुम मौत को
यह नहीं तुमको बताया जाएगा

है मुहब्बत खूबसूरत सी बला
जाल में इसके फंसाया जाएगा

प्यार में वादा करो पर सोच कर
देखना, तुमसे निभाया जाएगा

यह नहीं कहता मुहब्बत मत करो
टूट कर क्या तुमसे चाहा जाएगा

जो मुहब्बत पाक सी है 'आरज़ू'
उसके आगे सर झुकाया जाएगा

आरज़ू-ए-अर्जुन

DIL KYO.N MERA HAR GAM KO SAHTA HAI.. GHAZAL

आदाब

दिल ये मेरा क्यों हर ग़म को सहता है
मजबूर नहीं जब, फिर किससे डरता है

हर दिन सोचे अपने कल के बारे में
क्यों वो आज नहीं जी भर के जीता है

तुम लाख बचाओ दामन अपना इससे
ये ईश्क सभी के दिल में घुस के रहता है

खानी दो ही रोटी पीना पानी जब
क्यों तू हरपल पैसा पैसा करता है

लड़की का वालिद होना आसान नहीं
वो आंसू पीता, शोलों में जलता है

तू मत इतरा बेटे की पैदाइश पे
श्रवण बेटे जैसा कौन निकलता है

मजबूर नहीं है बात कोई सुनने को
बस बेटी की ख़ातिर वो सुन लेता है

वो सोने की थाली से भी नाखुश है
मुफलिस भूखा रह के भी पल जाता है

तू कर सकता है पार ये दरिया 'अर्जुन'
तू चाहे तो चट्टान गिरा सकता है

आरज़ू-ए-अर्जुन