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पहला क़दम उठाओ !

बस,पहला क़दम उठाओ 
हमने खुद को खुद की ही बेड़ियों में जकड लिया है, अपने ही दायरे में सिमट कर रह गए हैं। हमने अपनी सोच समझ को सीमित कर लिया है, अपनी सहूलियत के मुताबिक एक सुरक्षा घेरा बना लिया है, अब उस घेरे से बाहर क़दम रखने में डर लगता है। जितनी ज़रूरत है उतना ही दिमाग चलता है उतने ही पाँव चलते है यहाँ तक कि हमने अपने ख़ाबों को भी दायरे में बांध रखा है। 
बड़ी अजीब सी बात है, आज ख़ाब किसी और के हैं, देखता कोई और है, पूरा कोई और कर रहा है, कमाल है। पूरी प्रणाली मशीनी हो गई है। आज हम अपने नहीं अपनों के ख़ाब पूरे करने की कोशिश कर रहे हैं और उसके लिए मेहनत हम नहीं हमारे अपने यानि माँ बाप, बड़े भाई यां बहिन करती हैं, सिर्फ़ ज़रिया हम बनते हैं। इस तरह से हम कुछ बन भी गए तो हमारी योग्यता क्या होगी,हमारी गुणवता क्या होगी। हम दूसरों से साधारण होंगे, दूसरे हमसे ज्यादा अक्लमंद होंगे, उनका तज़ुर्बा हमसे बेहतर होगा। और ऐसा क्यों होता है ? क्योकि हमने अपना पहला कदम खुद नहीं उठाया था। हमने अपनों की बैसाखिया थाम रखी थी। कभी धूप बर्दाश्त ही नहीं की, बारिश में ठिठुर के काँपे ही नहीं, कभी आग में जले ही नहीं, कभी न…
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DIL TUMHARA JAB CHURAYA JAYEGA.. GHAZAL

आदाब
दिल तुम्हारा जब चुराया जाएगा
दोष तुमपर ही लगाया जाएगा

इस मुहब्बत में फ़क़त पहले पहल
तुमको पलकों पर बिठाया जाएगा

तोल लेना पर को तुम अपने यहाँ
तुमको ऊँचा भी उड़ाया जाएगा

उड़ना लेकिन छोड़ मत देना ज़मीं
तुमको नीचे भी गिराया जाएगा

झांकना मत आंखों में वो फ़र्ज़ी है
ख़ाब झूठा ही दिखाया जाएगा

बढ़ रहे आहिस्ता से तुम मौत को
यह नहीं तुमको बताया जाएगा

है मुहब्बत खूबसूरत सी बला
जाल में इसके फंसाया जाएगा

प्यार में वादा करो पर सोच कर
देखना, तुमसे निभाया जाएगा

यह नहीं कहता मुहब्बत मत करो
टूट कर क्या तुमसे चाहा जाएगा

जो मुहब्बत पाक सी है 'आरज़ू'
उसके आगे सर झुकाया जाएगा

आरज़ू-ए-अर्जुन

DIL KYO.N MERA HAR GAM KO SAHTA HAI.. GHAZAL

आदाब

दिल ये मेरा क्यों हर ग़म को सहता है
मजबूर नहीं जब, फिर किससे डरता है

हर दिन सोचे अपने कल के बारे में
क्यों वो आज नहीं जी भर के जीता है

तुम लाख बचाओ दामन अपना इससे
ये ईश्क सभी के दिल में घुस के रहता है

खानी दो ही रोटी पीना पानी जब
क्यों तू हरपल पैसा पैसा करता है

लड़की का वालिद होना आसान नहीं
वो आंसू पीता, शोलों में जलता है

तू मत इतरा बेटे की पैदाइश पे
श्रवण बेटे जैसा कौन निकलता है

मजबूर नहीं है बात कोई सुनने को
बस बेटी की ख़ातिर वो सुन लेता है

वो सोने की थाली से भी नाखुश है
मुफलिस भूखा रह के भी पल जाता है

तू कर सकता है पार ये दरिया 'अर्जुन'
तू चाहे तो चट्टान गिरा सकता है

आरज़ू-ए-अर्जुन

चलो योग करें

Aaj ke yoga divas par meri ye rachna..

         चलो योग करें

एक  काम सभी  हम रोज़ करें
योग   करें   चलो   योग   करें

भारत  की  पहचान   है   यह
वेद-पुराण  का  ग्यान  है  यह
स्वस्थ   विश्व   कल्याण   हेतु
जन जन का अभियान है यह

सीखें    और     प्रयोग    करें
योग   करें   चलो   योग   करें

मन  को निर्मल  करता  है यह
तन को  कोमल  करता है यह
है  यह  उन्नति  का  मार्ग  भी
सबको  चंचल  करता  है  यह

बस  इसका  सद  उपयोग करें
योग   करें   चलो    योग   करें

पश्चिम   ने   अपनाया   इसको
सबने   गले   लगाया    इसको
रोग  दोष   से  पीड़ित  थे  जो
राम  बाण  सा  बताया  इसको

सादा    जीवन   उपभोग   करें
योग   करें    चलो   योग   करें

आरज़ू-ए-अर्जुन

Tera seena ho jisse tar...

आदाब

तेरा  सीना  हो  जिससे  तर  मैं  वो बौछार बन जाऊँ
तेरेे   सूखे  लबों   पे  आब  मैं   हर  बार   बन  जाऊँ

निभाऊं  फ़र्ज   सब  अपने  मुझे  ये  ज़िंदगी  जो  दे
जो सबकुछ भूल कर हसता है वो किरदार बन जाऊँ

भंवर  से  खींच  लाये  जो  डरी  कश्ती  किनारे  पर
मुझे  दे  हौसला  मालिक  मैं  वो  पतवार  बन जाऊँ

सदा  चलती  रही आंधी जहाँ नफ़रत की दहशत की
उसी  वादी  में  चाहत अम्न  का  गुलज़ार बन जाऊँ

कभी  फुर्सत  नहीं  मिलती  मेरी  मां  को  मेरे घर से
मै  अक्सर  चाहूं  ये  उनके  लिए  इतवार  बन जाऊँ

कभी  अंगूर   की   बेटी   से   चाहत  की  नहीं   मैने
पिलाओ  तुम  अगर आंखों से तो मयख़ार बन जाऊँ

मेरे  गीतों  में  ग़ज़लों  में  मिले  खुशबू  मुहब्बत  की
मैं  अपने हर  सुख़न में  मीठी सी झनकार बन जाऊँ

मुझे  तुम   सोचते  हो   बस  तुम्हारी  'आरज़ू'  हूँ  मैं
मगर  मैं   सोचता  हूँ   ये   तेरा   संसार   बन   जाऊँ

आरज़ू-ए-अर्जुन

Teri murli bhulaye kaam saare

................राधे श्याम...................

तेरी   मुरली    भुलाये.   काम    सारे
बसा   मन   में   मेरे   मोहन  तू  प्यारे

सताये  गोपियों    को    शाम    सुंदर
कभी    होरी   में    उनपे    रंग   डारे

हो  मुरलीधर  कभी गिरिधर तू कान्हा
है   लाखों   नाम   दुनिया  में   तुम्हारे

तुम्हीं  गीता  तुम्हीं   हो   सार  उसका
तुम्हीं   हो   मार्ग   दर्शक   भी   हमारे

है  दिल  में  क्या छुपा  सब जानते हो
भरी   झोली   तुम्हें   जो   भी   पुकारे

जो तुझको इक नज़र  बस देखे मोहन
बता  कैसे  न  दिल  अपना   वो  हारे

तेरे   दर   का   भिखारी   आरज़ू    है
पड़ा   है   दर    पे    वो    तेरे   सहारे

आरज़ू-ए-अर्जुन

Tera seena ho jisse tar..

आदाब

तेरा  सीना  हो  जिससे  तर  मैं  वो बौछार बन जाऊँ
तेरेे   सूखे  लबों   पे  आब  मैं   हर  बार   बन  जाऊँ

निभाऊं  फ़र्ज   सब  अपने  मुझे  ये  ज़िंदगी  जो  दे
जो सबकुछ भूल कर हसता है वो किरदार बन जाऊँ

भंवर  से  खींच  लाये  जो  डरी  कश्ती  किनारे  पर
मुझे  दे  हौसला  मालिक  मैं  वो  पतवार  बन जाऊँ

सदा  चलती  रही आंधी जहाँ नफ़रत की दहशत की
उसी  वादी  में  चाहत अम्न  का  गुलज़ार बन जाऊँ

कभी  फुर्सत  नहीं  मिलती  मेरी  मां  को  मेरे घर से
मै  अक्सर  चाहूं  ये  उनके  लिए  इतवार  बन जाऊँ

कभी  अंगूर   की   बेटी   से   चाहत  की  नहीं   मैने
पिलाओ  तुम  अगर आंखों से तो मयख़ार बन जाऊँ

मेरे  गीतों  में  ग़ज़लों  में  मिले  खुशबू  मुहब्बत  की
मैं  अपने हर  सुख़न में  मीठी सी झनकार बन जाऊँ

मुझे  तुम   सोचते  हो   बस  तुम्हारी  'आरज़ू'  हूँ  मैं
मगर  मैं   सोचता  हूँ   ये   तेरा   संसार   बन   जाऊँ

आरज़ू-ए-अर्जुन