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filbadeeh 74.. baad e saba

बाद-ए-सबा आॅनलाईन 'मुशायरा' कार्यक्रम
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फ़िलबदीह संख्या-(74 )
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दिनांक- 11 /6 /2017
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दिन- <<< रविवार >>>।
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समय-शाम  4 :00 बजे से
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आदाब ! दोस्तो..
आज का फ़िलबदीह मुशायरा मशहूर शायरजनाब " आरज़ू-ए-अर्जुन " साहब के ऐज़ाज़
में आप ही के मिसरे पर मुन्अक़िद है...
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तर्ही मिसर'अ
** " आज फिर वो दिल दुखाने आ गए " **
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वज़न
2122---2122----212
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अर्कान
फ़ाइलातुन  फ़ाइलातुन  फाइलुन
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बहर
बहरे - बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ ।
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क़ाफ़िया = दुखाने, "आने" की बंदिश
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रदीफ़ =... आ गए ।
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क्वाफ़ी-
 बहाने, जताने, सुनाने, चुराने, बुलाने, मनाने, सुलाने,झुलाने, कराने, बताने, समाने, आने, जाने, खाने, पाने ढाने, दाने आदि 🍉🍉🍉
गीत-
1- दिल के अरमाँ आसुओ में बह गये ।
2- आपके पहलू में आके रो दिये ।
3- कल चमन था आज इक सहरा हुआ ।
4- पर्वतों से आज मैं टकरा गया।
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दोस्तो शाम  के 4 बज चुके हैं और अबइंतिज़ार की घड़ियाँ ख़त्म हुईं।
लीजिये सज चुकी है महफ़िल-ए-'बाद -ए-सबा ए-ग़ज़ल।
तो अब इंतिज़ार किस बात का?दिल खोलकर अश्आर कहें,
ग़ज़लों का लुत्फ़ उठायें औरअन्य साथियों कीहौसला अफ़जाई भी करते रहें।
आइये शे'रो-सुखन की इस शानदार महफ़िल काभरपूर आनंद लें।
धन्यवाद।
समस्त बाद -ए-सबा परिवार

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