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हर आदमी के दिल में उजाला दिखाई दे.. ग़ज़ल

आदाब

हर आदमी  के  दिल में  उजाला  दिखाई दे
रौशन  रहे  सदा  न  वो  काला  दिखाई  दे

है  ज़िन्दगी  सराब  सी सहरा  में  जल रही
तरसी  हुई  निगाह  को  प्याला  दिखाई  दे

औरत  की आबरु की  हिफाज़त अगर करे
तो  हर  बशर  यहाँ पे  निराला  दिखाई  दे

इंसानियत  की बात को  समझें अगर सभी
मस्जिद  मिले दिलों  में, शिवाला दिखाई दे

जो  मारते  हैं कोख में  लड़की को भी यहां
वो  औरतें  शैतान   की  ख़ाला  दिखाई  दे

हसते  हैं  जो छिपा के  निगाहों में आब को
उनके  दिलों  में  फूटता  छाला  दिखाई  दे

ग़र  देश   के   वज़ीर   वफ़ादार  बन  सकें
मुफ़लिस के हाथ में भी निवाला  दिखाई दे

अख़बार  की नज़र  को  यहाँ  देख 'आरज़ू '
दुनिया की हर तड़प भी  मसाला दिखाई दे

आरज़ू -ए-अर्जुन

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