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DIL KYO.N MERA HAR GAM KO SAHTA HAI.. GHAZAL

आदाब

Image may contain: 1 person, shoes and outdoor दिल ये मेरा क्यों हर ग़म को सहता है
मजबूर नहीं जब, फिर किससे डरता है

हर दिन सोचे अपने कल के बारे में
क्यों वो आज नहीं जी भर के जीता है

तुम लाख बचाओ दामन अपना इससे
ये ईश्क सभी के दिल में घुस के रहता है

खानी दो ही रोटी पीना पानी जब
क्यों तू हरपल पैसा पैसा करता है

लड़की का वालिद होना आसान नहीं
वो आंसू पीता, शोलों में जलता है

तू मत इतरा बेटे की पैदाइश पे
श्रवण बेटे जैसा कौन निकलता है

मजबूर नहीं है बात कोई सुनने को
बस बेटी की ख़ातिर वो सुन लेता है

वो सोने की थाली से भी नाखुश है
मुफलिस भूखा रह के भी पल जाता है

तू कर सकता है पार ये दरिया 'अर्जुन'
तू चाहे तो चट्टान गिरा सकता है

आरज़ू-ए-अर्जुन

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